कभी-कभी इमारत भी पाठशाला बन जाती है Fort की Asiatic Society Library का यह वीडियो देखते हुए सबसे पहले उसकी सीढ़ियाँ और ऊँची छतें ध्यान खींचती हैं। लेकिन मुझे अच्छा लगा कि इसे केवल सुंदर विरासत-स्थल की तरह नहीं दिखाया गया। 1804 से चली आ रही संस्था का असली महत्व...
शहर को चलाने की कीमत सिर्फ टिकट में नहीं होती मुंबई में रोज़ की यात्रा को केवल दूरी से समझना मुश्किल है। दादर से किसी जगह तक पहुँचने में कितने मिनट लगेंगे, यह इस पर भी निर्भर करता है कि लोकल मिलेगी या नहीं, स्टेशन तक पैदल चलने की जगह कैसी है, और आख़िरी हिस्से...
पकाने का समय भी रेसिपी का हिस्सा है मेरी माँ की लिखी रेसिपियों में मात्रा के साथ एक और जानकारी रहती है: “जल्दी हो तो पहले प्याज़ काट लेना।” यह मामूली सलाह नहीं है। घर का खाना तभी रोज़मर्रा में टिकता है जब वह बजट, समय और बर्तनों की संख्या में फिट बैठे। इसलिए प...
मदनपुरा को पढ़ना, सिर्फ़ देखना नहीं मुंबई के पुराने इलाक़ों को हम अक्सर इमारतों, बाज़ारों और रास्तों से याद करते हैं। मदनपुरा की कहानी पढ़ते हुए लगा कि किसी मोहल्ले का इतिहास उसकी गलियों से ज़्यादा, वहाँ टिके हुए संवादों में रहता है। सिनेमा, अदब और रोज़मर्रा...
बायकुला स्टेशन को देखकर समझ आता है कि विरासत रोज़मर्रा की भी हो सकती है मुंबई में हम अक्सर पुराने स्टेशनों को बस रास्ते का हिस्सा समझकर पार कर जाते हैं। बायकुला स्टेशन भी ऐसा ही है - ट्रेन पकड़ने की जल्दी, प्लेटफ़ॉर्म पर आती-जाती भीड़, और ऊपर से शहर की लगातार...
Vikram-1 का प्रक्षेपण सिर्फ निजी क्षेत्र की जीत नहीं; असली परीक्षा यह है कि Mission Aagaman से बनी तकनीकी समझ कितनी जल्दी कक्षाओं, प्रयोगशालाओं और भारतीय विद्यार्थियों तक पहुँचती है।
गेंद नीचे क्यों आती है, भारी होने के कारण नहीं आज कक्षा में मैंने दो गेंदें दिखाईं - एक टेनिस गेंद और एक लोहे की छोटी गेंद। स्वाभाविक उत्तर आया, “लोहे वाली पहले गिरेगी, क्योंकि वह भारी है।” मैंने कहा, पहले अनुमान लिखिए, फिर प्रयोग करेंगे। जहाँ भ्रम शुरू होता...
खगोल विज्ञान सीखना केवल तारों के नाम याद करना नहीं है कक्षा में जब कोई छात्र पूछता है, “सर, ब्लैक होल दिखता कैसा है?”, तो असली काम सुंदर चित्र दिखाना नहीं, बल्कि यह पूछना है: हम किसी अदृश्य वस्तु का पता किस आधार पर लगाते हैं? 1. कक्षा की गति से द्रव्यमान का अ...
INJAO 2026 की राह में पाँच चरण हैं - जूनियर विज्ञान परीक्षा, प्रशिक्षण और रात के आकाश का अवलोकन भी। 25 विद्यार्थियों के कोलकाता कैंप तक पहुँचने की बात है। किताब का बना तारामंडल रटकर असली आकाश नहीं समझ आता। पहले अनुमान लगाइए कि आज रात क्या दिखेगा, फिर सिर उठाक...