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गेंद नीचे क्यों आती है, भारी होने के कारण नहीं

गेंद नीचे क्यों आती है, भारी होने के कारण नहीं

आज कक्षा में मैंने दो गेंदें दिखाईं - एक टेनिस गेंद और एक लोहे की छोटी गेंद। स्वाभाविक उत्तर आया, “लोहे वाली पहले गिरेगी, क्योंकि वह भारी है।” मैंने कहा, पहले अनुमान लिखिए, फिर प्रयोग करेंगे।

जहाँ भ्रम शुरू होता है यदि दोनों गेंदों को लगभग एक ही ऊँचाई से साथ छोड़ें, तो वे लगभग साथ जमीन पर पहुँचती हैं। भारी गेंद पर पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल सचमुच अधिक लगता है, लेकिन उसका द्रव्यमान भी अधिक है। त्वरण में ये दोनों प्रभाव एक-दूसरे को काट देते हैं।

हवा की छोटी-सी शरारत टेनिस गेंद और लोहे की गेंद का आकार अलग है, इसलिए वायु प्रतिरोध परिणाम को थोड़ा बदल सकता है। पंख और सिक्का निर्वात में साथ गिरते हैं। कक्षा में यह बात बताने से पहले चित्रों में बने लंबे तीरों को देखना पड़ता है, क्योंकि कई आरेख हवा को ऐसे दिखाते हैं मानो वह गेंद से निजी दुश्मनी रखती हो।

घर पर जाँच दो समान आकार की गेंदें लीजिए, उन्हें एक ही ऊँचाई से छोड़िए और वीडियो को धीमा करके देखिए। पहले परिणाम का अनुमान लगाना मत छोड़िए। भौतिकी का आधा आनंद इसी में है कि प्रकृति हमारे आत्मविश्वास को बहुत विनम्रता से सुधार देती है।

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